लोथल कहाँ स्थित है? इतिहास और यहाँ कैसे पहुंचे?

लोथल कहाँ स्थित है?

अहमदाबाद से लगभग 80 किमी दक्षिण-पश्चिम में, 4,500 साल पहले इस पुरातात्विक स्थल पर खड़ा लोथल शहर सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे महत्वपूर्ण शहर था, और वैसे आपका यह सवाल भी सही है की लोथल कहाँ स्थित है तो यह भारत के गुजरात में अहमदाबाद से 80 किलोमीटर दुरी पर लोथल भुरखी नामक Saragwala सरगवाला ग्राम में स्थित है और इसका विस्तार आज के पाकिस्तान तक फैला हुआ है। उत्खनन से दुनिया की सबसे पुरानी ज्ञात कृत्रिम खदान का पता चला, जो साबरमती नदी के प्राचीन प्रवाह से जुड़ी थी। अन्य विशेषताओं में एक्रोपोलिस, निचला शहर, एक मनका कारखाना, गोदाम और एक सीवेज सिस्टम शामिल हैं।

लोथल को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल के रूप में शामिल करने के लिए नामांकित किया गया है। यात्री नहरों और शिपयार्ड जैसे पुरातत्वविदों द्वारा आकर्षक खोज देख सकते हैं जो बताते हैं कि यह एक महत्वपूर्ण व्यापारिक शहर कैसे था। कलाकृतियों से संकेत मिलता है कि व्यापार मेसोपोटामिया, मिस्र और फारस के साथ हुआ होगा। यहां एक बाजार और घाट वाला एक पूरा शहर खोजा गया था।

पुरातत्व संग्रहालय (सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक, शुक्रवार को बंद) साइट के पास गहने, मिट्टी के बर्तनों, मुहरों, धार्मिक प्रतीकों और दैनिक उपयोग की वस्तुओं जैसी कई कलाकृतियां हैं।

लोथल कहाँ स्थित है?
लोथल

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लोथल का इतिहास और विश्व का सबसे पहला अंतराष्ट्रीय बंदरगाह

लोथल को दो शब्दों का मेल कहा जाता है; लोथ और थेले, जिसका गुजराती में अर्थ है “मृतकों का टीला”। शहर 3700 ईसा पूर्व के दौरान बसा हुआ था और एक संपन्न व्यापारिक बंदरगाह था। पुराने शहर की खोज के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा 13 फरवरी, 1955 से 19 मई, 1960 तक खुदाई शुरू की गई थी। पुरातत्वविदों का मानना ​​है कि यह शहर सिंध से गुजरात में सौराष्ट्र तक के प्राचीन व्यापार मार्ग पर एक प्रमुख नदी प्रणाली का हिस्सा था। यहां की खुदाई से आधुनिक भारत में पुरातत्व के सबसे अधिक निशान मिले हैं।

लोथल, भारत के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखता है, पुरातत्व विभाग की रिसर्च के अनुसार यह सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विश्व के कुछ प्रारंभिक बंदरगाहों में से एक था और इसका फैलाव अर्थात व्यापार आज के ईरान, इराक, अरब की खाड़ी, पश्चिमी एशिया, अफ्रीका और मेसोपोटानिया तक होता था। लोथल के बंदरगाह उस समय के सबसे विकसित बंदरगाहों में से एक था जहाँ दिन के तक़रीबन 1000 जहाज का व्यापार होता था।

लोथल का बंदरगाह जिसे गोदी भी कहा जाता है इसे दुनिया का पहला आदमी के द्वारा बनाया गया बंदरगाह कहा जाता है। लोथल के इस बंदरगाह की खोज सबसे पहले यहाँ के उत्खनन प्रमुख डॉक्टर एस आर राव ने की थी और ये उनके ही सतत प्रयासों का परिणाम है जिसकी वजह से हम आज लोथल पर गर्व कर पा रहे है। सन 1955 से 1960 के बीच हुई खोज से यह सामने आया की लोथल का यह डाकयार्ड उस समय का एकमात्र अंतराष्ट्रीय डाकयार्ड था और सिर्फ डाकयार्ड ही नहीं बल्कि एक व्यस्ततम बंदरगाह था। आपको जानकार आश्चर्य होगा की इसका इतिहास 3000 वर्षों से भी ज्यादा पुराना है।

Map par lothal
मानचित्र पर लोथल कहाँ स्थित है?

यह डॉक (गोदी) एक ऐसी जगह पर बनाई गई जिसे आधुनिक भाषा में (sea lanes of communication) कहते है। 37 मीटर की लम्बाई पर पूर्व से पश्चिम तक और करीबन 22 मीटर उत्तर से दक्षिण तक फैले इस विशाल डॉक को दुनिया का सबसे पहला मानव निर्मित डाकयार्ड भी कहा जाता है। क्या हो अगर आपको पता चले की लोथल के बंदरगाह की गोदी या बंदरगाह के सिद्धांत आज भी 21 वीं सदी में भी लागू होते है? जी हां आपने सही सुना। इस गोदी की संरचना में जिस इंजीनियरिंग का इस्तेमाल हुआ है वो आज के आधुनिक युग में इस्तेमाल हो रहा है, चौकिये मत हम बात कर रहे है हाइड्रोलॉजी और पानी के दबाव के महत्व को भली भांति समझते थे और इसी का इस्तेमाल कर उन्होंने इस डॉक का निर्माण किया।

लोथल कहाँ स्थित है, कैसे पहुंचें?

सड़क द्वारा
लोथल अहमदाबाद से 80 किमी दूर है।

ट्रेन से
अहमदाबाद के गांधीग्राम स्टेशन से लोथल-भुरखी स्टेशन तक पांच दैनिक ट्रेनें चलती हैं, जो साइट से 6 किमी दूर है। स्टेशन से आप किसी एक बस से साइट पर जा सकते हैं। वैकल्पिक रूप से अहमदाबाद से वापसी के लिए कैब लें।

हवाईजहाज से
निकटतम हवाई अड्डा अहमदाबाद (80KMs) है

आशा करते है की आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा और कुछ नई जानकारी भी प्राप्त हुई होगी तो अगली बार अगर आपसे कोई यह पूछे की लोथल कहाँ स्थित है तो उसके साथ हमारे देश के इस महान इतिहास को साझा करें और न सिर्फ साझा करे वरन लोथल का एक दौरा भी कर आये। धन्यवाद।

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